अब हम बड़े हो गए है | By Vishal Kumar
अब हम बड़े हो गए है |
निकल पड़े है एक अनजान से रास्ते पर ,
अरमानो को गले लगाए ,
जिम्मेदारिया बढ़ चुकी है मेरी , क्युकि
अब हम बड़े हो गए है |
एक बार बोल देने से ही फ़रमाइसे पूरी हो जाती थी ,
उस घर में सिर्फ मेरी ही मनमानी होती थी ,
अब दुनिया के धक्के खा कर समझ आया है ,
वो पिता भी फरिश्ते से कम न था |
कददू पसंद नहीं था मुझे , मग़र
अब खिचड़ी भी खा ही लेते है |
बना-बनाया खाने वाले ,
अब कुछ भी कच्चा-पक्का सा खा ही लेते है | |
अपने FAVORITE PILLOW के लिए फाइट करने वाले ,
अब नीचे जमीन पर भी सो जाया करते है ,
अब तो नींद भी उतनी नहीं आती साहब , क्युकि
अब हम बड़े हो गए है | |
याद आता है वो पल , जब
माँ के सुबह उठाने पे चिल्लाते थे |
अब तो ALARM से पहले ही उठ जाते है और सोचते है ,
काश !! हम बड़े ही न हुए होते |
--- विशाल कुमार
निकल पड़े है एक अनजान से रास्ते पर ,
अरमानो को गले लगाए ,
जिम्मेदारिया बढ़ चुकी है मेरी , क्युकि
अब हम बड़े हो गए है |
एक बार बोल देने से ही फ़रमाइसे पूरी हो जाती थी ,
उस घर में सिर्फ मेरी ही मनमानी होती थी ,
अब दुनिया के धक्के खा कर समझ आया है ,
वो पिता भी फरिश्ते से कम न था |
कददू पसंद नहीं था मुझे , मग़र
अब खिचड़ी भी खा ही लेते है |
बना-बनाया खाने वाले ,
अब कुछ भी कच्चा-पक्का सा खा ही लेते है | |
अपने FAVORITE PILLOW के लिए फाइट करने वाले ,
अब नीचे जमीन पर भी सो जाया करते है ,
अब तो नींद भी उतनी नहीं आती साहब , क्युकि
अब हम बड़े हो गए है | |
याद आता है वो पल , जब
माँ के सुबह उठाने पे चिल्लाते थे |
अब तो ALARM से पहले ही उठ जाते है और सोचते है ,
काश !! हम बड़े ही न हुए होते |
--- विशाल कुमार
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